Bhakoot Dosha क्या है? विवाह से पहले जानना क्यों है जरूरी

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bhakoot dosha

विवाह से पहले कुंडली मिलान करवाते समय जब आप अलग-अलग दोषों के बारे में सुनते हैं, तो मन में स्वाभाविक  रूप से डर और भ्रम पैदा होता है। उन्हीं दोषों में से एक है bhakoot dosha
कई लोग इसे बहुत गंभीर मानते हैं, तो कुछ लोग इसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन सच क्या है?
अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि भकूट दोष क्या होता है, यह क्यों बनता है, इसका वैवाहिक जीवन पर क्या असर पड़ता है और क्या इसके उपाय सच में कारगर होते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहाँ आपको जानकारी सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक भाषा में मिलेगी, ताकि आप बिना घबराहट के सही निर्णय ले सकें।

Bhakoot Dosha क्या है और इसका ज्योतिषीय महत्व

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भकूट दोष कुंडली मिलान की अष्टकूट पद्धति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दोष है। अष्टकूट मिलान में कुल 36 गुण होते हैं, जिनमें से भकूट कूट को 7 गुण दिए गए हैं। इससे साफ पता चलता है कि विवाह मिलान में इसका कितना महत्व है।

भकूट दोष तब बनता है जब वर और वधू की चंद्र राशियाँ आपस में प्रतिकूल स्थिति में होती हैं। चंद्रमा मन, भावना, सोच और मानसिक संतुलन का कारक माना जाता है।
जब दो लोगों की चंद्र राशियाँ मेल नहीं खातीं, तो उनके विचार, भावनाएँ और जीवन को देखने का नजरिया अलग-अलग हो सकता है। यही अंतर आगे चलकर रिश्ते में असहमति, तनाव और दूरी का कारण बन सकता है।

अष्टकूट मिलान में भकूट का स्थान क्यों अहम है

अष्टकूट मिलान में भकूट का स्थान क्यों अहम है

कुंडली मिलान में कई लोग केवल कुल गुणों पर ध्यान देते हैं, लेकिन अनुभवी ज्योतिषी जानते हैं कि हर कूट का महत्व अलग-अलग होता है।
भकूट कूट सीधे-सीधे पति-पत्नी के मानसिक तालमेल से जुड़ा होता है। यदि इस कूट में शून्य गुण मिलते हैं, तो इसे हल्के में नहीं लिया जाता।

भकूट दोष होने पर यह माना जाता है कि:

  • पति-पत्नी के बीच भावनात्मक समझ में कमी हो सकती है

  • आपसी विचारों में टकराव की स्थिति बन सकती है

  • पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद हो सकते हैं

हालाँकि, यह सब हर कुंडली में समान रूप से लागू नहीं होता, क्योंकि अन्य ग्रह योग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भकूट दोष क्यों बनता है

भकूट दोष मुख्य रूप से वर और वधू की चंद्र राशियों के आपसी संबंध पर निर्भर करता है। ज्योतिष के अनुसार कुछ विशेष राशि संयोजन ऐसे होते हैं, जो भकूट दोष का कारण बनते हैं।

2-12 राशि संबंध

इस स्थिति में एक राशि दूसरी से दूसरी या बारहवीं होती है।
यह संयोजन अक्सर भावनात्मक दूरी, खर्च और बचत को लेकर मतभेद, तथा एक-दूसरे की जरूरतों को न समझ पाने का संकेत देता है।

5-9 राशि संबंध

इसमें विचारधारा, जीवन मूल्यों और धार्मिक सोच में अंतर देखा जाता है।
पति-पत्नी दोनों सही हो सकते हैं, लेकिन सोच अलग होने के कारण टकराव की स्थिति बन जाती है।

6-8 राशि संबंध

इसे सबसे संवेदनशील स्थिति माना जाता है।
इसमें मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ और रिश्ते में खिंचाव देखने को मिल सकता है।

इन तीनों स्थितियों में bhakoot dosha बनता है, लेकिन इसका प्रभाव कुंडली के अन्य योगों पर भी निर्भर करता है।

क्या हर भकूट दोष नुकसानदायक होता है?

यह सवाल लगभग हर व्यक्ति के मन में आता है।
सच्चाई यह है कि हर भकूट दोष समान असर नहीं देता। कई बार कुंडली में मौजूद शुभ ग्रह, मजबूत लग्न और सकारात्मक योग इस दोष के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर देते हैं।

उदाहरण के लिए:

  • यदि चंद्र राशियों के स्वामी ग्रह आपस में मित्र हों

  • यदि नवांश कुंडली मजबूत हो

  • यदि विवाह के बाद शुभ दशा चल रही हो

तो भकूट दोष का असर सीमित रह सकता है। इसलिए केवल दोष देखकर विवाह से इंकार करना सही तरीका नहीं माना जाता।

भकूट दोष के संभावित प्रभाव

वैवाहिक जीवन पर असर

भकूट दोष का सबसे पहला असर पति-पत्नी के आपसी संबंधों पर पड़ता है।

  • छोटी-छोटी बातों पर मतभेद

  • भावनात्मक दूरी

  • एक-दूसरे की भावनाओं को समझने में कठिनाई

यदि समय रहते संवाद और समझदारी न दिखाई जाए, तो ये समस्याएँ बढ़ सकती हैं।

आर्थिक और पारिवारिक प्रभाव

कई मामलों में यह देखा गया है कि भकूट दोष वाले दंपती आर्थिक फैसलों पर एकमत नहीं हो पाते।
इसके अलावा पारिवारिक जिम्मेदारियों, रिश्तेदारों से संबंध और संतान सुख से जुड़ी चिंताएँ भी सामने आ सकती हैं।

यह जरूरी नहीं कि ये सभी प्रभाव हर व्यक्ति पर लागू हों, लेकिन संभावना को नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता।

भकूट दोष के प्रकार

भकूट दोष को समझने के लिए इसके प्रकार जानना जरूरी है, क्योंकि हर प्रकार का प्रभाव अलग हो सकता है।

द्वादश भकूट दोष

यह 2-12 राशि संबंध में बनता है।
इसमें भावनात्मक असंतुलन, खर्च को लेकर असहमति और जीवन की प्राथमिकताओं में अंतर देखा जाता है।

नवम-पंचम भकूट दोष

यह 5-9 राशि संबंध से जुड़ा होता है।
इसमें सोच, विश्वास और भविष्य की योजनाओं को लेकर मतभेद होते हैं।

षडाष्टक भकूट दोष

यह 6-8 स्थिति में बनता है और इसे सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
इसमें मानसिक दबाव, स्वास्थ्य समस्याएँ और रिश्ते में अस्थिरता देखी जा सकती है।

 भकूट दोष से जुड़े आम मिथक और सच्चाई

 मिथक: भकूट दोष होने पर शादी सफल नहीं होती

यह पूरी तरह गलत है। कई ऐसे दंपती हैं जिनकी कुंडली में भकूट दोष होता है, फिर भी उनका वैवाहिक जीवन संतुलित और सुखद रहता है।

 सच्चाई: संपूर्ण कुंडली का अध्ययन जरूरी है

भकूट दोष को समझने के लिए लग्न, नवांश, ग्रह दशा और ग्रहों की स्थिति को देखना जरूरी होता है।
केवल एक दोष के आधार पर निर्णय लेना जल्दबाज़ी हो सकती है।

भकूट दोष के उपाय

यदि आपकी कुंडली में भकूट दोष है, तो घबराने की जरूरत नहीं। सही उपाय अपनाकर इसके असर को कम किया जा सकता है।

वैदिक उपाय

  • भकूट दोष निवारण पूजा

  • नवग्रह शांति

  • चंद्र शांति अनुष्ठान

ये उपाय मानसिक संतुलन और रिश्तों में सामंजस्य लाने में सहायक माने जाते हैं।

मंत्र जाप और पूजा

  • चंद्र मंत्र का नियमित जाप

  • भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना
    इनसे वैवाहिक जीवन में समझ और स्थिरता आती है।

जीवनशैली और दान

  • सोमवार का व्रत

  • सफेद वस्तुओं का दान

  • बड़ों का सम्मान और संयमित व्यवहार

ये सरल उपाय धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करते हैं।

रत्न और यंत्र

कुछ मामलों में ज्योतिषी की सलाह से मोती धारण करने की सलाह दी जाती है।
हालाँकि बिना विशेषज्ञ परामर्श के रत्न पहनना उचित नहीं माना जाता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या bhakoot dosha हमेशा हानिकारक होता है?

 नहीं, इसका असर कुंडली के अन्य योगों पर निर्भर करता है।

Q2. क्या विवाह के बाद भी इसका उपाय किया जा सकता है?

 हाँ, विवाह के बाद भी उपाय और सही व्यवहार से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

Q3. क्या ऑनलाइन कुंडली मिलान भरोसेमंद है?

ऑनलाइन मिलान प्रारंभिक जानकारी देता है, लेकिन संपूर्ण विश्लेषण के लिए अनुभवी ज्योतिषी से सलाह जरूरी है।

निष्कर्ष 

अब आप यह समझ चुके हैं कि bhakoot dosha कोई डराने वाली अवधारणा नहीं, बल्कि एक ज्योतिषीय स्थिति है जिसे सही तरीके से समझना जरूरी है।
यह दोष वैवाहिक जीवन में मानसिक तालमेल, भावनात्मक समझ और आपसी संतुलन से जुड़ा होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विवाह असफल ही होगा।

यदि आप संपूर्ण कुंडली का अध्ययन करवाते हैं, सही उपाय अपनाते हैं और रिश्ते में संवाद व सम्मान बनाए रखते हैं, तो भकूट दोष का प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि कुंडली दिशा दिखाती है, लेकिन रिश्ते की मजबूती आपके व्यवहार और समझ पर निर्भर करती है।